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महेश बाबू का जीवन परिचय: करोड़ों की संपत्ति, ब्लॉकबस्टर फिल्में और अनसुने किस्से | Mahesh Babu Biography in Hindi
महेश बाबू का जीवन परिचय (Mahesh Babu Biography in Hindi)
भूमिका: साउथ सिनेमा के 'अल्टीमेट प्रिंस'
भारतीय सिनेमा, विशेषकर तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री (टॉलीवुड) में जब भी स्टाइल, सादगी, कड़क अभिनय और बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्डतोड़ कमाई की बात आती है, तो एक नाम सबसे ऊपर चमकता है—महेश बाबू (Mahesh Babu)। फैंस उन्हें प्यार से 'प्रिंस' (Prince) और 'सुपरस्टार' कहते हैं। ८० के दशक में एक बाल कलाकार के रूप में कदम रखने वाले महेश बाबू आज के समय में भारतीय सिनेमा के सबसे महंगे और प्रभावशाली अभिनेताओं में से एक हैं। उनकी एक झलक पाने के लिए करोड़ों फैंस दीवाने रहते हैं। वह सिर्फ अपनी बेहतरीन फिल्मों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने कड़क अनुशासन, हैंडसम लुक्स और अपनी बेमिसाल दानवीरता के लिए भी जाने जाते हैं। आज हम इस महान सुपरस्टार के फर्श से अर्श तक के सफर को बेहद गहराई से जानेंगे।
प्रारंभिक जीवन, जन्म और पारिवारिक विरासत (Early Life & Birth)
महेश बाबू का असली नाम घट्टामनेनी महेश बाबू है। उनका जन्म ९ अगस्त १९७५ को मद्रास (अब चेन्नई), तमिलनाडु में हुआ था। वह तेलुगु सिनेमा के दिग्गज और पुराने जमाने के सुपरस्टार कृष्णा (घट्टामनेनी शिव रामा कृष्ण मूर्ति) और इंदिरा देवी के चौथे बच्चे हैं। महेश बाबू का बचपन मद्रास में ही बीता, क्योंकि उस समय तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री का मुख्य केंद्र मद्रास ही हुआ करता था। उनके बड़े भाई रमेश बाबू भी एक अभिनेता और निर्माता रहे, और उनकी तीन बहनें—पद्मावती, मंजुला और प्रियदर्शिनी हैं।
चूंकि उनके पिता बहुत बड़े स्टार थे, इसलिए महेश बाबू का नाता बचपन से ही कैमरों और सेट से रहा। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा मद्रास के प्रसिद्ध 'सेंट बेड्स एंग्लो इंडियन हायर सेकेंडरी स्कूल' से पूरी की। बहुत कम लोग जानते हैं कि भारतीय क्रिकेट टीम के मशहूर खिलाड़ी रविचंद्रन अश्विन भी इसी स्कूल में उनके जूनियर थे। इसके बाद, महेश बाबू ने चेन्नई के 'लोयोला कॉलेज' से कॉमर्स (B.Com) की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने विशाखापत्तनम में निर्देशक एल सत्यनानंद से एक्टिंग की कड़क ट्रेनिंग ली।
बाल कलाकार के रूप में शुरुआत (The Child Artist Era)
महेश बाबू ने बहुत ही कम उम्र में कैमरे का सामना करना शुरू कर दिया था। जब वह मात्र ४ वर्ष के थे, तब साल १९७९ में उन्होंने अपने पिता की फिल्म 'नीडा' (Needa) के सेट पर जाकर एक छोटी सी भूमिका निभाई थी। इसके बाद एक बाल कलाकार के रूप में उन्होंने 'पोरातम', 'शंखरवं', 'बाजार राउडी', 'मुग्गुरु कोडुकुलु' और 'बालचंद्रु' जैसी कई फिल्मों में काम किया।
उनके पिता सुपरस्टार कृष्णा की एक कड़क शर्त थी कि महेश बाबू सिर्फ अपनी स्कूल की छुट्टियों (Vacations) के दौरान ही फिल्मों की शूटिंग करेंगे, ताकि उनकी पढ़ाई पर कोई बुरा असर न पड़े। साल १९९० में आई फिल्म 'अन्ना थम्मुडु' के बाद महेश बाबू ने पढ़ाई पूरी करने के लिए फिल्मों से एक लंबा ब्रेक ले लिया।
बतौर मुख्य अभिनेता डेब्यू और पहला बड़ा धमाका (The Mega Debut)
पढ़ाई और एक्टिंग की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद, साल १९९९ में महेश बाबू ने फिल्म 'राजाकुमारुडु' (Raja Kumarudu) से बतौर मुख्य अभिनेता (Lead Actor) धमाकेदार डेब्यू किया। इस फिल्म में उनके अपोजिट बॉलीवुड अभिनेत्री प्रीति जिंटा थीं। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत बड़ी हिट साबित हुई और फैंस ने उनके गुड लुक्स और स्टाइल को हाथों-हाथ लिया। इस पहली ही फिल्म के लिए उन्हें 'नंदी अवार्ड फॉर बेस्ट मेल डेब्यू' मिला।
इसके बाद उन्होंने 'युवराजु' और 'वम्सी' जैसी फिल्मों में काम किया। लेकिन साल २००१ में आई फिल्म 'मुराली' (Murari) उनके करियर का पहला सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई। इस सुपर-नेचुरल ड्रामा फिल्म में उनके कड़क अभिनय ने समीक्षकों और दर्शकों दोनों का दिल जीत लिया और उन्हें सिनेमा जगत में एक गंभीर अभिनेता के रूप में पहचान मिली।
व्यक्तिगत जानकारीविवरण
पूरा नामघट्टामनेनी महेश बाबू
मशहूर नामप्रिंस, सुपरस्टार, टॉलीवुड किंग
जन्म तिथि९ अगस्त १९७५
जन्म स्थानचेन्नई (मद्रास), तमिलनाडु
पिता का नामसुपरस्टार कृष्णा
पत्नी का नामनम्रता शिरोडकर (पूर्व मिस इंडिया)
पहली फिल्म (Lead)राजाकुमारुडु (१९९९)
'पोकिरी' का तूफान और स्टारडम का नया शिखर (The Global Phenomenon)
साल २००३ में आई फिल्म 'ओक्काडु' (Okkadu) ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया। यह उस समय की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में से एक बनी, जिसके लिए महेश बाबू को अपना पहला फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर (तेलुगु) का पुरस्कार मिला। इसी फिल्म को बाद में बॉलीवुड में अर्जुन कपूर के साथ 'तेवर' नाम से रीमेक किया गया था।
लेकिन साल २००६ में जो हुआ, उसने इतिहास बदल दिया। कड़क निर्देशक पुरी जगन्नाथ के निर्देशन में बनी फिल्म 'पोकिरी' (Pokiri) ने तेलुगु सिनेमा के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। इस फिल्म में महेश बाबू ने एक अंडरकवर पुलिस अफसर का किरदार निभाया था। उनके कड़क डायलॉग्स, शर्टलेस फाइट्स और अनोखे एटीट्यूड ने युवाओं को पागल कर दिया था।
यह फिल्म उस समय की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली तेलुगु फिल्म बनी और इसी फिल्म का रीमेक बॉलीवुड में सलमान खान के साथ 'वांटेड' (Wanted) नाम से बना, जिसने सलमान खान के डूबते करियर को पुनर्जीवित किया था। 'पोकिरी' की सफलता ने महेश बाबू को टॉलीवुड का 'नंबर वन सुपरस्टार' बना दिया।
लगातार ब्लॉकबस्टर फिल्मों की झड़ी
'पोकिरी' के बाद महेश बाबू ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने एक से बढ़कर एक कड़क और संदेशपरक ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं। साल २०११ में आई फिल्म 'दूकुडु' (Dookudu) ने यूएसए (USA) बॉक्स ऑफिस पर भारतीय फिल्मों के लिए कमाई के नए रास्ते खोले। इसके बाद 'बिजनेसमैन' (Businessman), 'सीतम्मा वकितलो सिरिमल्ले चेट्टू', 'श्रीमंतुडु' (Srimanthudu), 'भरत अने नेनु' (Bharat Ane Nenu), 'महर्षि' (Maharshi), 'सरिलेंरु नीकेव्वरु' और 'सार्कारू वारी पाटा' जैसी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर सैकड़ों करोड़ की कमाई की।
फिल्म 'भरत अने नेनु' में उन्होंने एक पढ़े-लिखे कड़क मुख्यमंत्री का किरदार निभाया था, जिसे पूरे देश में बहुत पसंद किया गया। वहीं 'महर्षि' फिल्म में उन्होंने एक बड़े बिजनेसमैन से किसान बनने के सफर को दिखाया, जिसके लिए इस फिल्म को 'सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय फिल्म' का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला।
रियल लाइफ के 'मसीहा': बेमिसाल दानवीरता (The Philanthropist)
अनुज भाई, महेश बाबू जितने बड़े पर्दे के राजा हैं, हकीकत की जिंदगी में उनका दिल उतना ही कोमल और महान है। वह बहुत ही शांत रहकर समाज सेवा का काम करते हैं और कभी इसका ढिंढोरा नहीं पीटते।
वह अपनी हर फिल्म की कमाई का ३०% हिस्सा सीधे चैरिटी और गरीब बच्चों के इलाज के लिए दान कर देते हैं।
उन्होंने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के दो गांवों—बुरीपलेम (Burripalem) और सिद्धापुरम (Siddhapuram) को पूरी तरह गोद लिया हुआ है, जहाँ वे शिक्षा, पानी और स्वास्थ्य की सारी ज़िम्मेदारी खुद उठाते हैं।
सबसे कड़क बात यह है कि महेश बाबू ने 'आंध्र हॉस्पिटल्स' के साथ मिलकर अब तक ४,००० से अधिक गरीब बच्चों के दिल का मुफ्त ऑपरेशन (Free Heart Surgeries) करवाया है। वे उन बच्चों के लिए साक्षात भगवान का रूप हैं।
पारिवारिक जीवन और बॉलीवुड से दूरी (Family & Bollywood Stand)
महेश बाबू का पारिवारिक जीवन बेहद खूबसूरत और विवादों से दूर रहा है। फिल्म 'वम्सी' की शूटिंग के दौरान उनकी मुलाकात बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और पूर्व मिस इंडिया नम्रता शिरोडकर से हुई थी। ५ साल के गहरे रिश्ते के बाद दोनों ने १० फरवरी २००५ को बहुत ही सादगी से शादी कर ली। शादी के बाद नम्रता ने फिल्मों को अलविदा कह दिया और वह महेश बाबू के बिजनेस और उनकी पीआर टीम को संभालती हैं। उनके दो बच्चे हैं—बेटा गौतम कृष्णा और बेटी सितारा घट्टामनेनी। सितारा भी सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय हैं।
जब भी महेश बाबू से बॉलीवुड (हिंदी फिल्मों) में काम करने को लेकर सवाल पूछा जाता है, तो उनका एक कड़क बयान हमेशा चर्चा में रहता है। उन्होंने साफ कहा था कि—"बॉलीवुड मुझे अफोर्ड नहीं कर सकता, और मैं हिंदी फिल्मों में काम करके अपना समय बर्बाद नहीं करना चाहता। मुझे तेलुगु सिनेमा ने जो प्यार और सम्मान दिया है, मैं वहीं खुश हूँ और अपनी फिल्मों के ज़रिए तेलुगु सिनेमा को पूरी दुनिया में ले जाना चाहता हूँ।" उनका यह एटीट्यूड दिखाता है कि वे अपनी माटी और इंडस्ट्री के प्रति कितने वफादार हैं।
महेश बाबू की कुल संपत्ति और आलीशान लाइफस्टाइल (Mahesh Babu Net Worth)
आज महेश बाबू अरबों की संपत्ति के मालिक हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति लगभग ₹२५० से ३०० करोड़ रुपये से अधिक है। वह एक फिल्म के लिए ₹६० से ८० करोड़ रुपये चार्ज करते हैं। इसके अलावा वे ब्रांड एंडोर्समेंट के मामले में साउथ के सबसे महंगे स्टार हैं।
हैदराबाद के पॉश इलाके जुबली हिल्स में उनका एक बेहद आलीशान बंगला है, जिसकी कीमत ₹३० करोड़ से ज्यादा है। उनके पास अपनी खुद की एक बेहद महंगी वैनिटी वैन है जिसकी कीमत लगभग ₹६ करोड़ है, जिसे 'एएमबी' (AMB) नाम दिया गया है। इसके अलावा वे लग्जरी गाड़ियों जैसे रेंज रोवर, ऑडी और मर्सिडीज के शौकीन हैं। वे 'AMB Cinemas' नाम के एक बेहद हाई-टेक और आलीशान मल्टीप्लेक्स थिएटर चेन के मालिक भी हैं, जो एशिया के सबसे बेहतरीन थिएटर्स में गिना जाता है।
निष्कर्ष: सादगी और सफलता की मिसाल
महेश बाबू का जीवन हमें सिखाता है कि आप चाहे सफलता के कितने भी ऊंचे शिखर पर पहुँच जाएं, लेकिन आपके पैर हमेशा ज़मीन पर होने चाहिए। इतनी बड़ी पारिवारिक विरासत होने के बाद भी उन्होंने अपनी मेहनत, कड़क एक्टिंग और अनुशासन के दम पर अपना खुद का एक अलग साम्राज्य खड़ा किया। शून्य अहंकार, असीम दानवीरता और अपनी कला के प्रति अटूट निष्ठा ही उन्हें करोड़ों दिलों का असली राजा बनाती है।
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